सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरकर सरकार को दी चुनौती
नेपाल की राजधानी काठमांडू सोमवार, 8 सितंबर को नारों और गुस्से से गूंज उठा। हजारों युवा छात्र-छात्राएं सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। वजह थी सरकार का अचानक लिया गया सोशल मीडिया बैन का फैसला। युवाओं का कहना है कि इस बैन के पीछे असली मकसद था भ्रष्टाचार और ‘नेपो किड’ कैंपेन को दबाना। आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण रही लेकिन धीरे-धीरे हिंसा भड़क उठी। अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है और 300 से ज्यादा घायल हो चुके हैं।
इस पूरे प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसे किसी राजनीतिक पार्टी या बड़े नेता ने नेतृत्व नहीं किया। बल्कि इस आंदोलन का चेहरा बने सुडान गुरुंग, जो कभी इवेंट मैनेजमेंट और नाइटलाइफ इंडस्ट्री से जुड़े थे लेकिन अब सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखते हैं।
इवेंट मैनेजमेंट से समाज सेवा तक का सफर – सुडान गुरुंग
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काठमांडू में जन्म, यहीं से शुरुआती पढ़ाई।
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करियर की शुरुआत इवेंट मैनेजमेंट और नाइटलाइफ इंडस्ट्री से।
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2015 के भूकंप में राहत कार्य के लिए अनौपचारिक ग्रुप बनाया।
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यही आगे चलकर ‘हामी नेपाल’ NGO बना।
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कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्यों से पहचान मिली।
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2020 के Enough is Enough आंदोलन में युवाओं की आवाज बने।
गुरुंग ने हाल में एक इंस्टाग्राम पोस्ट में खुलासा किया था कि उनके समूह ने औपचारिक रूप से रैली निकालने की इजाजत मांगी थी। उन्होंने छात्रों से स्कूल यूनिफॉर्म पहनने और किताबें साथ लाने की अपील की, ताकि यह प्रदर्शन किसी हिंसा का नहीं बल्कि शांतिपूर्ण प्रतिरोध का प्रतीक बने।
'नेपो किड' कैंपेन से शुरू हुई चिंगारी
नेपाल में पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चल रहा था—‘नेपो किड’। इसमें आम नागरिकों के बच्चों और मंत्रियों के बच्चों की लाइफस्टाइल की तुलना की जा रही थी। महंगे ब्रांड्स, विदेश यात्राएं और लग्जरी आइटम्स ने युवाओं को नाराज कर दिया। खासकर प्रधानमंत्री ओली की बेटी की फोटो, जिसमें उनके हाथ में करोड़ों की घड़ी दिख रही थी, ने विवाद को और बढ़ा दिया।
युवाओं का आरोप है कि इसी कैंपेन को दबाने के लिए सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म बैन कर दिए।
आंदोलन की सात बड़ी वजहें
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सोशल मीडिया बैन – युवाओं की कमाई और संवाद का जरिया छिन गया।
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भ्रष्टाचार – पिछले चार साल में तीन बड़े घोटाले सामने आए।
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सियासी अस्थिरता – पाँच साल में तीन प्रधानमंत्री।
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बेरोजगारी और असमानता – बेरोजगारी दर 10% से ज्यादा।
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विदेशी दबाव – कभी अमेरिका तो कभी चीन का हस्तक्षेप।
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भारत से रिश्तों में खटास – लिपुलेख विवाद और चीन की नजदीकी से आर्थिक दबाव।
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भाई-भतीजावाद – नेताओं के बच्चों की ऐशो-आराम की जिंदगी से युवाओं का मोहभंग।
सोशल मीडिया से आंदोलन की ताकत
हैशटैग #स्टॉप_करप्शन, #GenZनेपाल और #वेकअप_नेपाल से यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया। इसे और ताकत दी काठमांडू के मेयर और मशहूर रैपर बालेन शाह की फेसबुक पोस्ट ने।
नेपाल की राजनीति पर असर
यह आंदोलन अब केवल सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं रहा। यह युवाओं के असंतोष और भविष्य की राजनीति का संकेत बन गया है। सवाल यह है कि क्या नेपाल की मौजूदा सरकार युवाओं की आवाज सुनेगी या फिर यह गुस्सा एक बड़े राजनीतिक तूफान का रूप लेगा।
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