Tuesday, 9 September 2025

काठमांडू में फूटा युवाओं का गुस्सा, आंदोलन का चेहरा बने सुडान गुरुंग


सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरकर सरकार को दी चुनौती


नेपाल की राजधानी काठमांडू सोमवार, 8 सितंबर को नारों और गुस्से से गूंज उठा। हजारों युवा छात्र-छात्राएं सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। वजह थी सरकार का अचानक लिया गया सोशल मीडिया बैन का फैसला। युवाओं का कहना है कि इस बैन के पीछे असली मकसद था भ्रष्टाचार और ‘नेपो किड’ कैंपेन को दबाना। आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण रही लेकिन धीरे-धीरे हिंसा भड़क उठी। अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है और 300 से ज्यादा घायल हो चुके हैं।

इस पूरे प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसे किसी राजनीतिक पार्टी या बड़े नेता ने नेतृत्व नहीं किया। बल्कि इस आंदोलन का चेहरा बने सुडान गुरुंग, जो कभी इवेंट मैनेजमेंट और नाइटलाइफ इंडस्ट्री से जुड़े थे लेकिन अब सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखते हैं।


 इवेंट मैनेजमेंट से समाज सेवा तक का सफर – सुडान गुरुंग

  • काठमांडू में जन्म, यहीं से शुरुआती पढ़ाई।

  • करियर की शुरुआत इवेंट मैनेजमेंट और नाइटलाइफ इंडस्ट्री से।

  • 2015 के भूकंप में राहत कार्य के लिए अनौपचारिक ग्रुप बनाया।

  • यही आगे चलकर ‘हामी नेपाल’ NGO बना।

  • कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्यों से पहचान मिली।

  • 2020 के Enough is Enough आंदोलन में युवाओं की आवाज बने।

गुरुंग ने हाल में एक इंस्टाग्राम पोस्ट में खुलासा किया था कि उनके समूह ने औपचारिक रूप से रैली निकालने की इजाजत मांगी थी। उन्होंने छात्रों से स्कूल यूनिफॉर्म पहनने और किताबें साथ लाने की अपील की, ताकि यह प्रदर्शन किसी हिंसा का नहीं बल्कि शांतिपूर्ण प्रतिरोध का प्रतीक बने।


'नेपो किड' कैंपेन से शुरू हुई चिंगारी

नेपाल में पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चल रहा था—‘नेपो किड’। इसमें आम नागरिकों के बच्चों और मंत्रियों के बच्चों की लाइफस्टाइल की तुलना की जा रही थी। महंगे ब्रांड्स, विदेश यात्राएं और लग्जरी आइटम्स ने युवाओं को नाराज कर दिया। खासकर प्रधानमंत्री ओली की बेटी की फोटो, जिसमें उनके हाथ में करोड़ों की घड़ी दिख रही थी, ने विवाद को और बढ़ा दिया।

युवाओं का आरोप है कि इसी कैंपेन को दबाने के लिए सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म बैन कर दिए।


आंदोलन की सात बड़ी वजहें

  1. सोशल मीडिया बैन – युवाओं की कमाई और संवाद का जरिया छिन गया।

  2. भ्रष्टाचार – पिछले चार साल में तीन बड़े घोटाले सामने आए।

  3. सियासी अस्थिरता – पाँच साल में तीन प्रधानमंत्री।

  4. बेरोजगारी और असमानता – बेरोजगारी दर 10% से ज्यादा।

  5. विदेशी दबाव – कभी अमेरिका तो कभी चीन का हस्तक्षेप।

  6. भारत से रिश्तों में खटास – लिपुलेख विवाद और चीन की नजदीकी से आर्थिक दबाव।

  7. भाई-भतीजावाद – नेताओं के बच्चों की ऐशो-आराम की जिंदगी से युवाओं का मोहभंग।


सोशल मीडिया से आंदोलन की ताकत

हैशटैग #स्टॉप_करप्शन, #GenZनेपाल और #वेकअप_नेपाल से यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया। इसे और ताकत दी काठमांडू के मेयर और मशहूर रैपर बालेन शाह की फेसबुक पोस्ट ने।


नेपाल की राजनीति पर असर

यह आंदोलन अब केवल सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं रहा। यह युवाओं के असंतोष और भविष्य की राजनीति का संकेत बन गया है। सवाल यह है कि क्या नेपाल की मौजूदा सरकार युवाओं की आवाज सुनेगी या फिर यह गुस्सा एक बड़े राजनीतिक तूफान का रूप लेगा।

Sunday, 7 September 2025

सोफिया फिरदौस कौन हैं....

 भुवनेश्वर : ओडिशा की राजनीति में जिस युवा चेहरे की चर्चा सबसे ज़्यादा है, वो नाम है सोफिया फिरदौस। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार के खिलाफ आवाज़ उठाकर, बीजेपी आईटी सेल पर FIR दर्ज कराके और विधानसभा में तेज-तर्रार भाषणों के ज़रिए उन्होंने खुद को फायर-ब्रांड युवा नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। 



ये सोफिया फिरदौस कौन हैं, जिनके नाम की गूंज आज पूरे ओडिशा की सियासत



में सुनाई दे रही है।


राजनीतिक पारी की शुरुआत – पिता से विरासत मिली पहचान


32 वर्षीय सोफिया फिरदौस, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद मोकिम की बेटी हैं। मोकिम भ्रष्टाचार के एक मामले में अयोग्य घोषित किए गए, जिसके बाद कांग्रेस ने 2024 के विधानसभा चुनाव में बाराबती-कटक सीट से सोफिया को टिकट दिया।

सोफिया ने अपने पहले ही चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को 8,000 से अधिक वोटों से हराकर जीत दर्ज की और ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक बनने का इतिहास रच दिया।


‘कटक की बेटी, कटक की बहू’ – दिल जीतने वाली टैगलाइन


चुनाव प्रचार के दौरान सोफिया ने खुद को जनता से जोड़ते हुए एक स्लोगन दिया – 

“कटक की बेटी, कटक की बहू”

यह टैगलाइन इतनी लोकप्रिय हुई कि हर वर्ग के मतदाताओं ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया। यही जुड़ाव उनके चुनावी सफ़र की सबसे बड़ी ताकत बना।


शिक्षा और पेशेवर पृष्ठभूमि


सोफिया की शैक्षिक पृष्ठभूमि भी उनके नेतृत्व को मजबूत बनाती है।


उन्होंने KIIT विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद IIM बैंगलोर से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले वे पारिवारिक बिज़नेस मेट्रो बिल्डर्स की निदेशक थीं। साथ ही, वे CREDAI भुवनेश्वर शाखा की अध्यक्ष और IGBC की स्थानीय इकाई की सह-अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इस पेशेवर अनुभव ने उन्हें सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर गहरी समझ दी।


पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर फोकस


सोफिया अपनी राजनीति को सिर्फ़ सियासत तक सीमित नहीं रखतीं। वे लगातार पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और कटक को हरित शहर बनाने जैसे मुद्दों को लेकर आवाज़ उठाती हैं। यही वजह है कि वे युवाओं और पढ़े-लिखे वर्ग के बीच लोकप्रिय हो रही हैं।



तेज-तर्रार और बेबाक अंदाज़


सोफिया लगातार बीजेपी सरकार पर हमलावर रहती हैं। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के खिलाफ हुए दुष्प्रचार का विरोध करते हुए उन्होंने न सिर्फ़ खुलकर बयान दिए बल्कि बीजेपी आईटी सेल के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई। इस कदम ने उन्हें युवा कार्यकर्ताओं की रोल मॉडल बना दिया।


निजी जीवन – उद्यमी से निकाह


सोफिया का निकाह ओडिशा के उद्यमी शेख मेराज उल हक़ से हुआ है। राजनीति और परिवार के बीच संतुलन बनाते हुए वे अपने आपको महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए एक प्रेरणा मानती हैं।


प्रेरणा और भविष्य की राह


सोफिया ने अपने राजनीतिक जीवन को ओडिशा की पहली महिला मुख्यमंत्री नंदिनी सत्पथी से प्रेरित बताया है। दिलचस्प बात यह है कि नंदिनी सत्पथी भी 1972 में बाराबती-कटक सीट से ही विधायक चुनी गई थीं।


आज की तारीख़ में सोफिया फिरदौस न केवल कांग्रेस की युवा और तेजस्वी नेता के रूप में देखी जा रही हैं, बल्कि ओडिशा की राजनीति में नई उम्मीद और नई दिशा के प्रतीक बन गई हैं। उनकी सक्रियता, जन-केंद्रित दृष्टिकोण और ऊर्जा उन्हें आने वाले समय में कांग्रेस का मजबूत चेहरा बना सकती है।


ओडिशा की राजनीति में अक्सर पारंपरिक चेहरे और जातीय समीकरण हावी रहते हैं। ऐसे में सोफिया फिरदौस जैसी पढ़ी-लिखी, आधुनिक सोच रखने वाली और जनता से सीधे जुड़ी हुई नेता का उभरना कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर है।


 

 


सोफिया खुद को “कटक की बेटी” कहती हैं, और यही पहचान उन्हें आज जनता से जोड़ रही है। शायद यही वजह है कि लोग कहने लगे हैं –

 कटक की बेटी अब ओडिशा की राजनीति का भविष्य है।”


7 सितम्बर को सचिन पायलट के जन्म दिन पर सोफिया फिरदौस ने पायलट को जन्म दिन की बधाई दी। 


पायलट ने जन्मदिन पर की विशेष पूजा, ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ अभियान का किया आगाज़

 चित्तौड़गढ़ : कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने रविवार को अपने 48वें जन्मदिवस के अवसर पर चित्तौड़गढ़ जिले के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर प्रदेश तथा देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।


मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए पायलट ने युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि छोटी उम्र के बच्चे भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने 14 साल तक के बच्चों को ड्रग्स की लत लगने की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई और कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पूरी पीढ़ी अंधकारमय हो जाएगी।


  युवाओं का युद्ध ड्रग्स के विरुद्ध’ अभियान का शुभारंभ


सचिन पायलट ने इस अवसर पर ‘युवाओं का युद्ध ड्रग्स के विरुद्ध’ नामक अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ यह जंग सिर्फ सरकार या प्रशासन की नहीं बल्कि पूरे समाज की है। उन्होंने आह्वान किया कि जाति, धर्म और राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर बच्चों को नशे से बचाने का प्रयास करना होगा।


उन्होंने प्रशासन से अपील की कि नशे की तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं और स्कूल-कॉलेजों में नशा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, पायलट ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में जाकर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि युवा शुरुआत से ही नशे के खतरों को समझ सकें।


पंजाब जैसे हालात का खतरा


अपने संबोधन में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नशे पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो राजस्थान की स्थिति भी पंजाब जैसी हो सकती है। उन्होंने कहा कि “हम कितनी भी सड़कें और पुल बना लें, लेकिन यदि हमारी आने वाली पीढ़ी ही नष्ट हो जाएगी तो यह सब बेकार हो जाएगा।”


बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए पायलट


अपने जन्मदिन के मौके पर सचिन पायलट ने सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहयोग की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में हाल की अतिवृष्टि और बाढ़ से भारी तबाही हुई है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए अपने एक माह का वेतन और अपनी माता, पूर्व विधायक रमा पायलट की एक माह की पेंशन दान करने की घोषणा की।


उन्होंने कहा कि “हम सब चाहते हैं कि जिन लोगों को नुकसान हुआ है, उन्हें शीघ्र राहत और सहायता मिले। मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि हालात जल्द सामान्य हों और प्रभावित परिवारों को संबल मिले।”


पिता राजेश पायलट को याद किया


कार्यक्रम के दौरान पायलट ने अपने पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वे साधारण परिवार से निकलकर अपने परिश्रम और संघर्ष से ऊँचाइयों तक पहुंचे थे। सचिन पायलट ने कहा कि उन्हें पिता से मिली शिक्षा और संस्कार ही उनके जीवन की पूंजी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार दें ताकि वे भविष्य में देश की नीतियों को तय करने वाले पदों तक पहुंच सकें।


सेवा कार्यों के जरिए जन्मदिन का उत्सव


चित्तौड़गढ़ के अलावा बूंदी में भी कार्यकर्ताओं ने सचिन पायलट का जन्मदिन सामाजिक सेवा के साथ मनाया। कुम्भा स्टेडियम स्थित रैन बसेरा में पीसीसी सदस्य सत्येश शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गरीब और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन कराया।


कार्यक्रम के दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष शैलेश सोनी ने कहा कि यह सेवा कार्य सचिन पायलट की सोच और सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का प्रतीक है। ब्लॉक अध्यक्ष रामकिरण मीणा और अन्य नेताओं ने कहा कि पायलट का नेतृत्व कांग्रेस को नई ऊर्जा देता है और वे राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानते हैं।


 


काठमांडू में फूटा युवाओं का गुस्सा, आंदोलन का चेहरा बने सुडान गुरुंग

सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरकर सरकार को दी चुनौती नेपाल की राजधानी काठमांडू सोमवार, 8 सितंबर को नारों और गुस्से से ग...