जयपुर। राजस्थान में सचिन पायलट ने जमींदारा पार्टी की विधायक सोना देवी बावरी के बाद आज एक ओर बडे नेता को भाजपा से कांग्रेस में शामिल कर लिया है हालांकी आज शामिल होने वाले नेता सहदेव चौधरी पहले कांग्रेस में ही थे और साल 2014 में वो कांग्रेस छोडकर भाजपा में शामिल हो गये थे लेकिन चार साल में ही सहदेव चौधरी का मन भाजपा से भर गया और बिना किसी शर्त के उन्होने वापस कांग्रेस पार्टी ज्वाइंन कर ली।सहदेव चौधरी ने इस दौरान कहा कि कांग्रेस के नेता पहले सडकों पर नही निकलते थे लेकिन अब सचिन पायलट के नेर्तत्व में लगातार कांग्रेस सडकों पर भी उतर रही है और यूवा नेतृत्व के साथ वो रहेंगे।
नागौर ने मुख्यमंत्री तो नही बनाया लेकिन मुख्यमंत्री बनवाये जरूर हैं
पार्टी ज्वाइन करते समय सहदेव चौधरी ने बार बार दोहराया कि वो मिर्धा परिवार के साथ मिलकर एक बार फिर कांग्रेस का परचम नागोर में फहरायेंगे,सहदेव ने कहा कि नागौर के लोकदेवताओ से लेकर नेता महान हुए है हालांकी इस दौरान नागोर से मुख्यमंत्री नही बनने की टीस भी उनकी सामने आ गयी चौधरी ने कहा कि नागौर से भले ही कोई मुख्यमंत्री ना बना हो लेकिन मुख्यमंत्री बनाने में नागौर का योगदान हमेशा रहा है।इस दौरान उन्होने कहा कि नगोर का किसान अब कांग्रेस के साथ है क्योकि भाजपा ने चुनावों में वादे तो बहुत किये लेकिन जब उन्हे पूरा करने का समय आया तो भाजपा से जनता को कुछ नही मिला।कांग्रेस में अब यूवा नेता आ रहें है जिससे पार्टी खुद को बदल रही है पायलट का नेतृत्व रहा तो कांग्रेस को कामयाबी जरूर मिलेगी।पहले नेता नागौर में ज्यादा धूमते नही थे
भाजपा के नेताओं ने अटैची तैयार कर रखी है भाजपा उन्हे संभाले
आज सहदेव चौधरी के दोबारा कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लेने के बाद सचिन पायलट खासे उत्साहित दिखायी दिये।पायलट ने कहा कि जो राहूल गांधी के नेतृतव पर भरोसा रखता है वो कांग्रेस के साथ जूड रहा है सहदेव चौधरी का फायदा कांग्रेस को पूरे संभाग में मिलेगा।पायलट ने साफ कहा कि सहदेव चौधरी ने बिना शर्त के कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की है किसकों क्या जिम्मेदारी मिलेगी ये समय तय करेगा टिकट की बात समय आने पर तय कि जायेगी।वही पायलट ने भाजपा के कांग्रेसियों को पार्टी में शामिल करने का प्लान बनाने की बात पर कहा कि अभी तो भाजपा के कई नेता अटैची तैयार करके कांग्रेस की और भाग रहें है कई नेताओ से वो सम्पर्क में भी है अब भाजपा अपने घर को पहले सम्भाल लें बाद में किसी कांग्रेसी को लेने की सोचे
क्या हनुमान बेनीवाल के खिलाफ मिर्धाओं को मजबूत करने के लिए हुई सहदेव की वापसी ?
नागोर की राजनीति में हमेशा से ही मिर्धा परिवार का बोलबाला रहा है बलदेव मिर्धा हो या हरेंन्द्र मिर्धा रिछपाल मिर्धा या फिर ज्योति मिर्धा ये सभी नेता मिर्धा परिवार के वर्चस्व को लगातार नागौर में बनाये हुए है लेकिन बीते दस साल इस परिवार के लिए अच्छे नही रहें और निर्दलिय विधायक हनुमान बेनीवाल ने मिर्धा परिवार की जगह जनता के मन में स्थान बना लिया।हनूमान बेनीवाल को उस क्षेत्र मे जैसे जैसे असर बढा वैसे वैसे मिर्धा परिवार कमजोर होता गया।बात करें नागौर की तो साल 1998 में हरेन्द्र मिर्धा जीते थे लेकिन उसके बाद 2003 और 2008 मे वो नागोर से चुनाव हार गये तो 2013 कें कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया इसपर हरेन्द्र मिर्धा निर्दलिय चुनाव लडे लेकिन जीत नसीब नही हुई।वही रिछपाल मिर्धा डेगाना की सीट से लगातार दो चुनाव हार चुकें है आज शामिल हुए सहदेव चौधरी तो सीधे साल 2008 में हनुमान बेनीवाल के सामने चुनावी रण में उतरे थे लेकिन उन्हे केवल 17 हजार वाटों के साथ तीसरे स्थान पर संतोष करना पडा था।अब कांग्रेस वापस सहदेव चौधरी को पार्टी में लाकर मिर्धा परिवार को एकजूट तो कर ही रही है साथ ही इस परिवार को एकजूट कर हनुमान बेनीवाल के तिलिस्म को तोडना चाहती है।कांग्रेस के वरिष्ठ जाट नेता डॉ हरी सिंह ने तो आज कह भी दिया कि पिछली बार जाटो के चलते ही भाजपा को 163 सीटें मिली थी अब वही जाट मिलकर कांग्रेस को इससे ज्यादा सीटें दिलवायेंगे।
नागौर ने मुख्यमंत्री तो नही बनाया लेकिन मुख्यमंत्री बनवाये जरूर हैं
पार्टी ज्वाइन करते समय सहदेव चौधरी ने बार बार दोहराया कि वो मिर्धा परिवार के साथ मिलकर एक बार फिर कांग्रेस का परचम नागोर में फहरायेंगे,सहदेव ने कहा कि नागौर के लोकदेवताओ से लेकर नेता महान हुए है हालांकी इस दौरान नागोर से मुख्यमंत्री नही बनने की टीस भी उनकी सामने आ गयी चौधरी ने कहा कि नागौर से भले ही कोई मुख्यमंत्री ना बना हो लेकिन मुख्यमंत्री बनाने में नागौर का योगदान हमेशा रहा है।इस दौरान उन्होने कहा कि नगोर का किसान अब कांग्रेस के साथ है क्योकि भाजपा ने चुनावों में वादे तो बहुत किये लेकिन जब उन्हे पूरा करने का समय आया तो भाजपा से जनता को कुछ नही मिला।कांग्रेस में अब यूवा नेता आ रहें है जिससे पार्टी खुद को बदल रही है पायलट का नेतृत्व रहा तो कांग्रेस को कामयाबी जरूर मिलेगी।पहले नेता नागौर में ज्यादा धूमते नही थे
भाजपा के नेताओं ने अटैची तैयार कर रखी है भाजपा उन्हे संभाले
आज सहदेव चौधरी के दोबारा कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लेने के बाद सचिन पायलट खासे उत्साहित दिखायी दिये।पायलट ने कहा कि जो राहूल गांधी के नेतृतव पर भरोसा रखता है वो कांग्रेस के साथ जूड रहा है सहदेव चौधरी का फायदा कांग्रेस को पूरे संभाग में मिलेगा।पायलट ने साफ कहा कि सहदेव चौधरी ने बिना शर्त के कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की है किसकों क्या जिम्मेदारी मिलेगी ये समय तय करेगा टिकट की बात समय आने पर तय कि जायेगी।वही पायलट ने भाजपा के कांग्रेसियों को पार्टी में शामिल करने का प्लान बनाने की बात पर कहा कि अभी तो भाजपा के कई नेता अटैची तैयार करके कांग्रेस की और भाग रहें है कई नेताओ से वो सम्पर्क में भी है अब भाजपा अपने घर को पहले सम्भाल लें बाद में किसी कांग्रेसी को लेने की सोचे
क्या हनुमान बेनीवाल के खिलाफ मिर्धाओं को मजबूत करने के लिए हुई सहदेव की वापसी ?
नागोर की राजनीति में हमेशा से ही मिर्धा परिवार का बोलबाला रहा है बलदेव मिर्धा हो या हरेंन्द्र मिर्धा रिछपाल मिर्धा या फिर ज्योति मिर्धा ये सभी नेता मिर्धा परिवार के वर्चस्व को लगातार नागौर में बनाये हुए है लेकिन बीते दस साल इस परिवार के लिए अच्छे नही रहें और निर्दलिय विधायक हनुमान बेनीवाल ने मिर्धा परिवार की जगह जनता के मन में स्थान बना लिया।हनूमान बेनीवाल को उस क्षेत्र मे जैसे जैसे असर बढा वैसे वैसे मिर्धा परिवार कमजोर होता गया।बात करें नागौर की तो साल 1998 में हरेन्द्र मिर्धा जीते थे लेकिन उसके बाद 2003 और 2008 मे वो नागोर से चुनाव हार गये तो 2013 कें कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया इसपर हरेन्द्र मिर्धा निर्दलिय चुनाव लडे लेकिन जीत नसीब नही हुई।वही रिछपाल मिर्धा डेगाना की सीट से लगातार दो चुनाव हार चुकें है आज शामिल हुए सहदेव चौधरी तो सीधे साल 2008 में हनुमान बेनीवाल के सामने चुनावी रण में उतरे थे लेकिन उन्हे केवल 17 हजार वाटों के साथ तीसरे स्थान पर संतोष करना पडा था।अब कांग्रेस वापस सहदेव चौधरी को पार्टी में लाकर मिर्धा परिवार को एकजूट तो कर ही रही है साथ ही इस परिवार को एकजूट कर हनुमान बेनीवाल के तिलिस्म को तोडना चाहती है।कांग्रेस के वरिष्ठ जाट नेता डॉ हरी सिंह ने तो आज कह भी दिया कि पिछली बार जाटो के चलते ही भाजपा को 163 सीटें मिली थी अब वही जाट मिलकर कांग्रेस को इससे ज्यादा सीटें दिलवायेंगे।

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